आपके मन का भ्रम आपको कुछ और ही देखने को मजबूर करता है और परिणाम ये होता है कि आप नक्कारात्मक और कभी अपने आप से प्रेम करने वाले ही बनकर रह जाते है |आत्म्प्रशंस्कों को लोग भले ही कुछ भी कहे कम से कम वे औरो को कोई नुक्सान तो नहीं पहुंचाते अथ सभी यदि स्वयं से प्यार करेंगे तभी उनकी संवेदनाए जिन्दा रहेंगी और वे दूसरों से भी प्रेम कर सकेंगे .
दिव्या वर्मा
दिव्या वर्मा